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हमारा परिचय

वनमाली सृजन पीठ सुप्रतिष्ठित कथाकार, शिक्षाविद् एवं चिंतक जगन्नाथ प्रसाद चौबे ‘वनमाली’ की सृजनात्मक परंपरा और वैचारिक विरासत को समर्पित एक साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था है। यह पीठ साहित्य, कला और चिंतन की विविध धाराओं के मध्य सार्थक संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से निरंतर सक्रिय है।

हमारा विश्वास है कि साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और संवेदना के बीच सेतु है। इसी दृष्टि से वनमाली सृजन पीठ रचनाधर्मियों, शोधार्थियों, शिक्षाविदों और नवोदित प्रतिभाओं के लिए एक खुला मंच प्रदान करती है, जहाँ विचारों का आदान-प्रदान, विमर्श और सृजनात्मक सहयोग संभव हो सके।

पीठ की गतिविधियों में साहित्यिक गोष्ठियाँ, व्याख्यानमाला, संवाद-सत्र, शोध-परियोजनाएँ तथा रचनात्मक कार्यशालाएँ सम्मिलित हैं। हमारा प्रयास है कि परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलित दृष्टि विकसित हो तथा बहुलता और समावेशिता के मूल्यों को रचनात्मक आचरण में प्रतिष्ठित किया जा सके।

जगन्नाथ प्रसाद चौबे

150+

वनमाली सृजन केंद्र

650+

प्रतिनिधि कहानियाँ प्रकाशित

200+

कथाकार (कथा मध्यप्रदेश)

300+

आलोचक की सहभागिता

वनमाली सृजन पीठ

वनमाली सृजन पीठ

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सुप्रतिष्ठित कथाकार, शिक्षाविद् तथा विचारक जगन्नाथ प्रसाद चौबे ‘वनमाली’ के रचनात्मक योगदान और स्मृति को समर्पित वनमाली सृजन पीठ एक साहित्यिक, सांस्कृतिक तथा रचनाधर्मी अनुष्ठान है, जो परंपरा तथा आधुनिक आग्रहों के बीच संवाद तैयार करने सतत सक्रिय है। साहित्य तथा कलाओं की विभिन्न विधाओं में हो रही सर्जना को प्रस्तुत करने के साथ ही उसके प्रति लोकरुचि का सम्मानजनक परिवेश निर्मित करना भी पीठ की प्रवृत्तियों में शामिल है। यह सृजन पीठ शोध, अन्वेषण, अध्ययन तथा लेखन के लिए नवोन्मेषी प्रयासों को प्रोत्साहित करती है।

  • वनमाली सृजनपीठ, भोपाल
  • वनमाली सृजनपीठ, बिलासपुर
  • वनमाली सृजनपीठ, दिल्ली
  • वनमाली सृजनपीठ, खंडवा
  • वनमाली सृजनपीठ, हजारीबाग
  • वनमाली सृजनपीठ, वैशाली
  • वनमाली सृजनपीठ, लखनऊ

वनमाली सृजन केंद्र

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सुदूर अंचलों, गाँव-कस्बों में कला, साहित्य, संस्कृति, सामाजिक सरोकारों की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश आदि में 150 से अधिक वनमाली सृजन केंद्रों की स्थापना की गई है।

वनमाली सृजन पीठ एवं सृजन केंद्रों का विश्वविद्यालयों से समन्वय

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राष्ट्रीय वनमाली कथा सम्मान

राष्ट्रीय वनमाली कथा सम्मान

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जशपुरनगर। भारत भर में रचनाधर्मियों को मंच उपलब्ध करने के उद्देश्य से-विश्वरंग के अंतर्गत साहित्य, कला, संस्कृति एवं सृजन के लिए समर्पित वनमाली सृजन पीठ की बिलासपुर शाखा से संबंधित वनमाली सृजन केंद्र जशपुर में सांस्कृतिक काव्य-संध्या का आयोजन शासकीय राम भजन रॉय एन ई एस स्नातकोत्तर महाविद्यालय जशपुर के स्वर्ण जयंती हॉल में सम्पन्न हुआ।

और देखें

वनमाली वार्ता

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विश्व रंग

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(टैगोर इंटरनेशनल लिटरेचर एंड आर्ट्स फेस्टिवल)

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विश्व रंग अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव ने साहित्य, कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक स्वर्णिम मुकाम बनाया है। भारत की सांस्कृतिक राजधानी भोपाल में आयोजित विश्व रंग टैगोर अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव 2019 के प्रथम अद्भुत-भव्य आयोजन का जिस तरह से पूरे विश्व ने अभिनंदन किया था वह साहित्य, कला, संगीत, संस्कृति, शिक्षा एवं सामाजिक सरोकारों के वैश्विक फलक पर रोशन सितारों की मानिंद सदैव के लिए अविस्मरणीय है।

उल्लेखनीय है कि कोरोना विभीषिका के रूप में सदी की सबसे भीषण आपदा के दौरान वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन आयोजित विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक महोत्सव ‘विश्व रंग 2020’ एवं ‘विश्व रंग 2021’ को न सिर्फ विश्व के 26 देशों ने मेजबानी की बल्कि 50 से अधिक देशों के हजारों रचनाकारों एवं लाखों-करोड़ों लोगों ने रचनात्मक उपस्थिति दर्ज कराकर विश्व रंग 2020 एवं विश्व रंग 2021 को कई गुना अधिक भव्यता के साथ अद्भुत, अविस्मरणीय और अभूतपूर्व बना दिया।

यह देश के इतिहास में पहली बार हुआ कि किसी शैक्षिक संस्थान रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय ने डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, आईसेक्ट विश्वविद्यालय, टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केंद्र, वनमाली सृजन पीठ, वनमाली सृजन केंद्रों एवं देश-विदेश की 100 से अधिक सांस्कृतिक संस्थाओं को साथ लेकर साहित्य एवं कला महोत्सव का अद्भुत संसार रचा।

देश में आयोजित होने वाले कई अन्य साहित्य उत्सव में अंग्रेजी का प्रभुत्व होता है। वेस्टर्न कल्चर की प्रधानता रहती है। वे महानगरों में एलिट क्लास तक सीमित रहते हैं। इन उत्सवों के बरक्स ‘विश्व रंग’ ने हिंदी और भारतीय भाषाओं को केंद्रीयता प्रदान करने का महत्वपूर्ण कार्य करते हुए हिंदी और भारतीय भाषाओं के बीच अपनत्व और परस्पर सम्मान का रिश्ता कायम करने का ऐतिहासिक कार्य किया। साथ ही इस बात को भी विशेष रूप से ध्यान में रखा कि हमारी भाषा को समृद्ध करने के लिए हमारी बोलियों का समृद्ध होना बहुत जरूरी है। अपनी भाषा से अपनी बोलियों को जोड़ना भी बहुत आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए ‘विश्व रंग’ ने हिंदी के साथ उसकी बोलियां–मालवी, बुंदेली, बघेली, छत्तीसगढ़ी, भोजपुरी, अवधी आदि के जमीनी सरोकार से संवाद को वैश्विक फलक प्रदान किया।

लगभग दो सौ से अधिक कथाकारों की कहानियों एवं देश भर के तीस से अधिक आलोचकों के विचारोत्तेजक लेख सम्मिलित किए गए हैं। ‘कथा मध्यप्रदेश’ ने देश भर में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।

आगामी कार्यक्रम

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चित्रा-वीथी

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अलंकरण समारोह

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